पक्षी विहार गिधवा

 "हमर चिरई हमर चिन्हारी"

बेलासपुर रइपुर रास्टीय रद्दा-130 के बिच म बेमेतरा जिला एक तहसील नांंदघाट हावे। इंहा ले बुड़ती डहर मुंगेली रद्दा मे डेढ़ कोस दुरिहा में दु ठन गांव गिधवा अउ परसदा हे। ऎ गांव हा अभी एखर सेती चरचा मे आइस काबर कि ए दुनो गांव के बांधा मे हजारों परवासी चिरई मन अपन बसेरा बसाये हे। गांव वाले मन बताथे कि इंहा चिरई मन जाड़ के दिन मे चालिस-पचास बछर ले आत हे अउ चार महीना रुके के बाद गरमी मे अपन देस चल देथे। लेकिन गांव वाले मन कभु ऎ चिरई मन ला नुसकान नई पहुंचा हे। सिकारी मन बन्दुक धर के आवय लेकिन गांव वाले मन ला पता चलिस त चिरई मन के संरक्षन सेती सिकारी मन ला मना करवा दिस। चिरई के जानकार मन बताईस कि इंहा 143 किसम के चिरई आये हे, जेमा कुछ ह इहचे के हरे कुछ चिरई मन युरोप, बर्मा, मंगोलीया, बांग्लादेस ले आथे। कई चिरई तो सरलग चालीस ले पइतालिस दिन उड़ात उड़ात पहुंचथे। इंहा के बांधा में चिरई मन बर चारा भरपुर मातरा में मिल जाथे। इंहा के जादा चिरई मन साकाहारी हे लेकिन कुछ चिरई माँसाहारी हे। परदेस सरकार हा कुछ दिन पहिली इंहा आइस अउ गांव वाले मन के सराहना करिस अउ हर बछर पक्षी महोत्सव मनाये के आसवासन दे के गिस, काबर कि गांव वाले मन के मया सेती ए चिरई मन के संरक्षन हो पाइस।

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