सफ़लता के चक्कर
मोर जीनगी करुवावत हे जी,
मोर सपना कुचरावत हे गा,
ए सफ़लता के चक्कर मा संगी,
मोर मन बइहावत हे गा,
कभु व्यापम, त कभु पी.एस.सी.
अउ आनी बानी के परिक्षा मै देवावत हंव गा,
जब नइ निकले काही त,
मै फ़िर से परिक्षा देवावत हंव गा,
ए सफ़लता के चक्कर मा संगी, मोर मन बइहावत हे गा!
मोर जीनगी कभु कभु निरस लागथे,
फ़ेर मन ला घलो भुलवारत हंव गा,
उमर के संग आँखी चौंधियावत हे,
भविस्य ला सोचबे ता आंसु डबडबावत हे गा,
ए सफ़लता के चक्कर मा संगी, मोर मन बइहावत हे गा!
आसरा झन छुटे कहिके,
हिरदे ला मनावत हंव गा,
अउ कतका तरसाबे जिनगी,
मै संघर्स संग जिनगी पहावत हंव गा,
मोर जिनगी करुवावत हे जी,
मोर सपना कुचरावत हे गा.!!
टिकेन्द्र नेताम "बेमेतरिहा"
झालम बेमेतरा
"अंतस के पिरा"
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