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Showing posts from July, 2021

पक्षी विहार गिधवा

 "हमर चिरई हमर चिन्हारी" बेलासपुर रइपुर रास्टीय रद्दा-130 के बिच म बेमेतरा जिला एक तहसील नांंदघाट हावे। इंहा ले बुड़ती डहर मुंगेली रद्दा मे डेढ़ कोस दुरिहा में दु ठन गांव गिधवा अउ परसदा हे। ऎ गांव हा अभी एखर सेती चरचा मे आइस काबर कि ए दुनो गांव के बांधा मे हजारों परवासी चिरई मन अपन बसेरा बसाये हे। गांव वाले मन बताथे कि इंहा चिरई मन जाड़ के दिन मे चालिस-पचास बछर ले आत हे अउ चार महीना रुके के बाद गरमी मे अपन देस चल देथे। लेकिन गांव वाले मन कभु ऎ चिरई मन ला नुसकान नई पहुंचा हे। सिकारी मन बन्दुक धर के आवय लेकिन गांव वाले मन ला पता चलिस त चिरई मन के संरक्षन सेती सिकारी मन ला मना करवा दिस। चिरई के जानकार मन बताईस कि इंहा 143 किसम के चिरई आये हे, जेमा कुछ ह इहचे के हरे कुछ चिरई मन युरोप, बर्मा, मंगोलीया, बांग्लादेस ले आथे। कई चिरई तो सरलग चालीस ले पइतालिस दिन उड़ात उड़ात पहुंचथे। इंहा के बांधा में चिरई मन बर चारा भरपुर मातरा में मिल जाथे। इंहा के जादा चिरई मन साकाहारी हे लेकिन कुछ चिरई माँसाहारी हे। परदेस सरकार हा कुछ दिन पहिली इंहा आइस अउ गांव वाले मन के सराहना करिस अउ हर बछर पक्षी...

मोर माटी...मोर गाँव

 छ.ग. परदेश के पहिली गौ-अभ्यारन बेमेतरा जिला मुख्यालय ले लगभग 3 कोस दुरिहा में राजकिय रद्दा करमान्क-07 के जेवनी बाजु में मोर छोटे से गाँव झालम बसे हे। हमर गाँव के परमुख बेवसाय कृषि हे लेकिन कुछ बछर पहिली बदैलिन (आवारा पशु गाय,बैल,सांड) के खतरा अब्बड बाड़ गे रहिसे। जेखर संखिया लगभग 600-800 रहिन हे, जेन खेत मे चल देतिस उहा के फ़सल ला एक बार मे चौपट कर देतिस, हमर गाँव अउ आजु बाजु गाँव के किसान मन बर अब्बड़ परेसानी रहिसे, अतेक के संख्या के जानवर ला एक साथ कोनो डहर लेगना भी चुनउती के बात रहिसे, तब तत्कालिन सरकार हा गाँव के 85-100 ऎकड़ के भाठा में हि बदैलिन के संरक्षन के गोठ कहिसे, अउ छ.ग. के पहिली गौ-अभ्यारन हमर गाँव झालम में इस्थापित होइसे। गौ-अभ्यारन बने ले अब हमर गाँव के किसान मन परमुख रुप ले धान,सोयाबीन,राहेर, तिवरा,चना,अउ कठई के बढ़िया पैदावार करथे, हमर गाँव बेमेतरा जिला के आदिवासी बाहुल गाँव हरे, ईंहा के करमा, सुवा नाच हा पुरा परदेश के साथ-साथ देश मा नाम कमाऎ हे, हमर गाँव में हर बछर करमा नाच माघ पुन्नी मेला के बिहान दिन मनाथे।

डा. भीमराव अम्बेडकर

         डा.अम्बेडकर...समरपित समाज बर! डा.भीमराव अम्बेडकर के नाव सुनके मन में सबले आघु बिचार छुआछुत अउ अपन दबे समाज ल ऎक अंधियारी जिनगी ले अन्जोरी जिनगी तक उबारे जाए के बिचार आथे।लेकिन बाबा साहेब के काम बुता ला ए सादा कागज अउ करीया कलम म लिखना सम्भव नइ हे। 14 अप्रेल 1891, मुहू (मध्यप्रान्त, ब्रिटिस भारत) म जन्मे बाबा साहेब के जिनगी अब्बड चुनउती ले गुजरिस। सिक्छा के बदउलत अपन समाज ल बदलिस। साहेब के मानना रहिस हे कि जिनगी म लाख बिपत्ति आ जाये पाछु नइ हटना हे। बाबा साहेब हर जे समाज ले आवय ओ समाज ल अछुत कहे जावय। जे हर गुलामी से भी भयन्कर रोग ए। जेखर कारन ए समाज ल समाजिक अउ आरथिक पिरा ले जुझे ल परिस हे। भारत देस ह एक डहर गुलामी के संकरी म लपटाए रहिस हे त बाबा साहेब के समाज ह छुआछुत अउ जातिवाद के दुआभेदी म लपटाये रहिस हे, त बाबा साहेब ह अपन जिनगी ल समाजिक बुरइ जइसे-छुआछुत, जातिवाद, दलित अउ सोसित समाज बर समरपित कर दिस। डा.बाबा साहेब के नाव महान समाज सुधारक ले घलो जानथे। स्वतन्त्र भारत के पहिली कानून मंतरी अउ भारतीय संविधान के जनक के नाव ले घलो जानथे। डा.भीमराव अम्बेडक...

सुरता...

 नानकीन किस्सा               सुरता.....सौ बछर पहिली के आज से दस बछर पहिली मोर गाँव के रद्दा हा नइ बने रहिस हे त मैं सुरता करके थर्रा जाथव कइसे रहिस होही आज से सौ बछर पहिली के छत्तीसगढ़! हमर पुरखा सियान मन अब्बड़ चुनउती ले ईहा जिनगी पहाइस, जिंहा छत्तीसगढ़ के महतारी के लइका मन अंगरेज सरकार के आघु म योद्धा बनके खड़ा होइस। कभु नहर के पानी ल बऊरे बर कर(लगान) लगावय, त कभु ओनहा(कपडा़) मिल म मजदूर मन करा जादा काम करा के कम मजदूरी देवय, त कभु आदिवासी मन ला जंगल म घुसरे बर अउ जंगल के लकड़ी ल बउरे म रोक लगावय, अब आदिवासी मन जंगल के रहइया जंगल ल छोड़ के कहा जातिस। अइसन बड़का-बड़का बिपदा ले हमर करान्तिकारी पुरखा मन डट के सामना करिन। कुछू चीज के बिरोध करय त अंगरेज़ मन जेल म घलो बन्द कर देवय। लेकिन मानना परही जेल जाए के बाद जेल ले हाथ से लिखे "पत्रिका" के छपई घलो कर देवय। जेल के बाहिर रहय ओखर संगवारी मन घलो कम नइ रहय, कभु रइपुर जेल के भीथिया ला डाइनामाइट ले उड़ाये के योजना बनाइस, त कभु दुरुग के कछेरी म आगी लगाइस। सदादिन एहसान रहिबो हमन अइसन करान्तिकारी पुरखा मन ...

माँ

 मेरे कलम में इतनी शक्ति नहीं है कि मैं 'माँ' शब्द को पूरी तरह से लिख सकूं। लेकिन कोशिश....🖋 माँ पर अगर कोई लिखने बैठे तो उसकी पूरी जिंदगी हो जाएगी लेकिन माँ पर लिखी हुई हर बात पूरी नहीं होगी यूं हि नहीं गुंजा किलकारी मेरे घर आंगन में, साँसे थाम कर मेरी माँ ने मुझे जनम दिया है..! वो बिना कहे सब कुछ जान लेती है, वो किसी मनोवैज्ञानिक से कम नहीं, ऎक माँ हि तो है जिसने मुझे जनम दिया है..! मै लाख कुछ भी छुपाऊ, मेरे पापा को पता नहीं होता लेकिन मेरी माँ सब कुछ जान लेती है..! गलती करने पर पापा डाटते है लेकिन छोड़ॊ ना बच्चे है करके ऎक पल में मां सब कुछ सुलझा लेती है..! वो घर मे सभी का खयाल रखती है, मेरे जरूरत के लिये अपने पैसे मुझपे कुर्बान कर देती है..! दुनिया में कोई नहीं माँ के जैसा, बच्चो के हर दुख दर्द को अपना मान लेती है..! टिकेन्द्र नेताम झालम,बेमेतरा