सुरता...
नानकीन किस्सा
सुरता.....सौ बछर पहिली के
आज से दस बछर पहिली मोर गाँव के रद्दा हा नइ बने रहिस हे त मैं सुरता करके थर्रा जाथव कइसे रहिस होही आज से सौ बछर पहिली के छत्तीसगढ़! हमर पुरखा सियान मन अब्बड़ चुनउती ले ईहा जिनगी पहाइस, जिंहा छत्तीसगढ़ के महतारी के लइका मन अंगरेज सरकार के आघु म योद्धा बनके खड़ा होइस। कभु नहर के पानी ल बऊरे बर कर(लगान) लगावय, त कभु ओनहा(कपडा़) मिल म मजदूर मन करा जादा काम करा के कम मजदूरी देवय, त कभु आदिवासी मन ला जंगल म घुसरे बर अउ जंगल के लकड़ी ल बउरे म रोक लगावय, अब आदिवासी मन जंगल के रहइया जंगल ल छोड़ के कहा जातिस। अइसन बड़का-बड़का बिपदा ले हमर करान्तिकारी पुरखा मन डट के सामना करिन। कुछू चीज के बिरोध करय त अंगरेज़ मन जेल म घलो बन्द कर देवय। लेकिन मानना परही जेल जाए के बाद जेल ले हाथ से लिखे "पत्रिका" के छपई घलो कर देवय। जेल के बाहिर रहय ओखर संगवारी मन घलो कम नइ रहय, कभु रइपुर जेल के भीथिया ला डाइनामाइट ले उड़ाये के योजना बनाइस, त कभु दुरुग के कछेरी म आगी लगाइस। सदादिन एहसान रहिबो हमन अइसन करान्तिकारी पुरखा मन के जेन आघु आके अइसन बड़का-बड़का बिपत्ती ले अपन मान-सम्मान अऊ माटी के खातिर सब्बो दिन बर अमर होगे।
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