माँ

 मेरे कलम में इतनी शक्ति नहीं है कि मैं 'माँ' शब्द को पूरी तरह से लिख सकूं। लेकिन कोशिश....🖋


माँ पर अगर कोई लिखने बैठे तो उसकी पूरी जिंदगी हो जाएगी लेकिन माँ पर लिखी हुई हर बात पूरी नहीं होगी


यूं हि नहीं गुंजा किलकारी मेरे घर आंगन में, साँसे थाम कर मेरी माँ ने मुझे जनम दिया है..!


वो बिना कहे सब कुछ जान लेती है, वो किसी मनोवैज्ञानिक से कम नहीं, ऎक माँ हि तो है जिसने मुझे जनम दिया है..!


मै लाख कुछ भी छुपाऊ, मेरे पापा को पता नहीं होता लेकिन मेरी माँ सब कुछ जान लेती है..!


गलती करने पर पापा डाटते है लेकिन छोड़ॊ ना बच्चे है करके ऎक पल में मां सब कुछ सुलझा लेती है..!


वो घर मे सभी का खयाल रखती है, मेरे जरूरत के लिये अपने पैसे मुझपे कुर्बान कर देती है..!


दुनिया में कोई नहीं माँ के जैसा, बच्चो के हर दुख दर्द को अपना मान लेती है..!


टिकेन्द्र नेताम

झालम,बेमेतरा 


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